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योग हमारी दिनचर्या का नियमित हिस्सा बने- योगाचार्य विष्णु आर्य ▪️वृद्धजन समाज की अमूल्य संपदा हैं- प्रो. एस पी व्यास ▪️वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय सामुदायिक भागीदारी की दिशा में अनूठी पहल : प्रो. अर्चना पाण्डेय

योग हमारी दिनचर्या का नियमित हिस्सा बने- योगाचार्य विष्णु आर्य

▪️वृद्धजन समाज की अमूल्य संपदा हैं- प्रो. एस पी व्यास

▪️वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय सामुदायिक भागीदारी की दिशा में अनूठी पहल : प्रो. अर्चना पाण्डेय


तीनबत्ती न्यूज : 30 मार्च ,2025

सागर. डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर एवं राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में वरिष्ठ नागरिकों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन के दूसरे दिन कई सत्रों का आयोजन किया गया. 

प्रथम सत्र में योग गुरु विष्णु आर्य ने विस्तार से योग शिक्षा और संस्कारों की आवश्यकता को बताया. आज की बदलती दिनचर्या, खानपान और मोबाइल के अति प्रयोग ने युवा,  प्रौढ़ और वृद्ध जनों सभी में स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बताया. उन्होंने कहा कि आज के समय में योग हमारी दिनचर्या का नियमित हिस्सा होना चाहिए. डॉ. ज्ञानेश तिवारी ने मानसिक स्वास्थ्य में आ रही गिरावट के साथ ही उससे निपटने का उपाय बताया. मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य परामर्श शिविर भी लगाया. डॉ. रेखा कालिया भारद्वाज ने सकारात्मक सोच के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता लाने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि उम्र महज एक अंक है. हम खान पान में बदलाव लाकर अपने स्वास्थ्य में सुधार ला सकते हैं. 


प्रो. अम्बिकादत्त शर्मा ने कहा कि वृद्धजनों को संगठित होकर न केवल अपनी समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए बल्कि अपने अनुभवों और उपस्थिति से परिवार, समाज और राष्ट्र का नेतृत्व करते हुए नई पीढ़ी को मार्गदर्शित भी करना चाहिए.  विवि के संयुक्त कुलसचिव संतोष सोहगौरा ने कहा कि मनोबल को हमेशा ऊंचा बनाये रखें. उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं. उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित सरकार की कई योजनाओं की, अधिनियमों की, मेटिनेन्स, चिकित्सा इत्यादि के बारे में अवगत कराया. 


पेंशनर्स एशोसिएशन के जिला प्रमुख हरिओम पाण्डेय ने कहा कि वरिष्ठ जनों का एक संगठन आवश्यक है. सरकार से हम अपनी अपेक्षाएं रख सकते हैं. हम अपने लिए अपनी बात सरकार से कह सकते हैं. हम आपस में चर्चा, विमर्श, सहयोग से अपना मानसिक और शारीरिक सम्बल बनाये रख सकते हैं. 


सामजिक न्याय विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. धनसिंह यादव ने कहा कि विकसित भारत के लिए मन को विकसित करना जरूरी है. वरिष्ठ नागरिक ज्ञान के भंडार हैं. उन्होंने कहा कि युवा और वरिष्ठों के बीच संवाद की कमी है. उन्होंने कई केस स्टडी उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए समाज केलिए किये जा रहे सरकारी प्रयासों की जानकारी दी ताकि वृद्ध गरिमापूर्ण जीवन जी सकें. उन्होंने चिकित्सा, वृद्ध आश्रम सहित टोल फ्री नंबर इत्यादि के बारे में जानकारी दी. 


एडवोकेट वीनू राणा ने वृद्ध जनों से संबंधित कई कानूनी पहलूओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि क़ानून की जरूरत तब पड़ती है जब लोग ईमानदारी से कार्य नहीं करते. जीवन में ईमानदार होना सबसे जरूरी है. उन्होंने लोक अदालत सहित घर से बेदखली से संबंधित कानून इत्यादि के बारे में क़ानूनी जागरूकता की जानकारी दी. 

अध्यक्षता करते हुए अपर जिला मजिस्ट्रेट रुपेश उपाध्याय ने कहा कि समाज में वरिष्ठ जनों को लेकर जो व्याप्त स्थिति है उसको दूर करने के प्रयास करने चाहिए. समाज के बिखरे ताने बाने को संजीदा बनाते हुए सामजिक बनावट को नये तरीके से गढ़ने की आवश्यकता है. उन्होंने वरिष्ठ जनों के लिए कई सरकारी प्रयासों की जानकारी दी और सागर में आगामी समय में नई पहल किये जाने की पहल के सम्बन्ध में चर्चा की. 


समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. एस. पी. व्यास, विशिष्ट अतिथि डीएवी विश्वविद्यालय जालंधर की पूर्व कुलसचिव डॉ. रेखा कालिया भारद्वाज एवं अध्यक्षता विश्वविद्यालय की सेवानिवृत प्रो. अर्चना पांडे ने की. स्वागत उद्बोधन कार्यक्रम के संयोजक प्रो. विनोद भारद्वाज ने दिया. दो दिन तक चले इस सम्मेलन का प्रतिवेदन डॉ ऋतु यादव ने प्रस्तुत किया. प्रतिभागियों द्वारा फीडबैक भी प्रस्तुत किया गया. 

प्रो. एस पी व्यास ने कहा कि मनुष्य क्या है, इसे हम सबको समझने की आवश्यकता है. हमें अपनी आवश्यकताओं को पहचानना है. उन्होंने विज्ञान के माध्यम से जीवन जीने की शैली को समझाया. उन्होंने कहा कि हम इतने बड़े समाज के हिस्से होकर खुद को अलग और अकेला क्यों समझते हैं. हमें अपनों के साथ जीना है और प्रासंगिक बने रहना है. उन्होंने कहा कि वृद्धवस्था के साथ गुणों को ग्राह्य करना चाहिए और अवगुणों का त्याग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि वृद्धजन अनुभव की सम्पदा हैं. उन्होंने कहा कि मनुष्य विचारों के दर्शन के साथ जीता है. यही मनुष्य का धर्म है. डॉ. रेखा भारद्वाज ने कहा कि परोपकारी बनें, आशावादी रहे, अपना ख्याल रखें, वर्तमान में जियें और अपने दुखों और परेशानियों से संघर्ष करना सीखें. सामुदायिक भागीदारी से खुद को सक्रिय बनाये रखें. 

प्रो. अर्चना पांडेय ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने अपने अकादमिक सरोकारों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन की दिशा में भी एक नई शुरुआत की है जिसके अंतर्गत समाज के वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल एवं चिंताओं को शामिल किया जा रहा है. विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाला वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ इस दिशा में एक अनूठी पहल है. 

कर्यक्रम का संचालन डॉ. राज बहादुर अनुरागी ने किया. आभार ज्ञापन डॉ. संजय शर्मा ने किया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारयों सहित सागर शहर एवं आस-पास के गाँवों के वरिष्ठ नागरिकों ने इस आयोजन में अपनी सहभागिता की.


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