बुंदेलखंड मेडिकल कालेज में सुपर स्पेशलिटी सेवाए अविलंब शुरू की जाए
▪️विधानसभा में बोले विधायक शैलेंद्र जैन : निजी स्कूलों द्वारा किताबों को खरीदने के दबाव का मुद्दा भी उठाया
तीनबत्ती न्यूज : 20 मार्च ,2025
सागर।मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र में बजट अनुदान मांगों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए वरिष्ठ विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि सागर का बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज 30- 35 सालों के अंतराल के बाद स्वीकृत हुआ,इसके निर्माण से हम सभी बुंदेलखंड वासियों के मन में एक भाव आया कि अब हमें उपचार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा लेकिन 15 वर्षों बाद भी हमारा मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशलिटी सेवाओं से अछूता है,कैंसर,हृदय रोग और न्यूरो जैसी बीमारियों के लिए हमे शहर से बाहर महानगर की ओर जाना पड़ता है ,आज जितने भी संभागीय मुख्यालय हैं उनमें स्थित मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी सेवाए शुरू हो चुकी है,सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में अभी तक ट्रॉमा सेंटर और ब्लड बैंक भी शुरू नहीं हो पाया है,इसी सदन में हमारे तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने ध्यानाकर्षण के जवाब में सागर में कैथ लैब शुरू करने की घोषणा की थी जो अभी तक पूर्ण नहीं हो पाई है, बीएमसी में कैथ लैब शुरू की जाए जिससे लोगों को इसका लाभ मिल सके,उन्होंने कहा कि बीएमसी में प्रतिदिन लगभग 20 डिलीवरी हो रही है जिसमें 50% डिलीवरी सीजर से हो रही है और उसमें स्थित एस एन सी यू, पी आई सी यू अभी 10 बिस्तर क्षमता के। है सीट बढाने की आवश्यकता है,इसमें इनकी क्षमता बढ़ाने हेतु आग्रह है । उन्होंने कहा कि गायनेकोलॉजी विभाग अभी 150 बिस्तर की क्षमता का है इस क्षमता को बढ़ाकर 300 बिस्तर किया जाए,बीएमसी में 10 नए ऑपरेशन थिएटर बनाए जाने है इसके हाउसिंग बोर्ड से अविलंब टेंडर लगाने हेतु आग्रह है,उन्होंने बीएमसी और जिला चिकित्सालय के मर्जर की प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को धन्यवाद दिया।
प्राइवेट स्कूलों द्वारा किसी प्रकाशक/दुकान विशेष से पुस्तके क्रय करने के लिए दबाव डालने का मुद्दा उठाया
विधानसभा में शून्यकाल के दौरान वरिष्ठ विधायक शैलेंद्र जैन ने अशासकीय मान्यता प्राप्त विद्यालयों द्वारा छात्र छात्राओं को पुस्तके किसी विशेष प्रकाशक/दुकान विशेष से क्रय करने हेतु बाध्य किए जाने का मामला उठाया,उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के अशासकीय मान्यता प्राप्त माध्यमिक शिक्षा मंडल, सीबीएसई, आई इस एस सी से संबद्ध विद्यालयों द्वारा छात्र छात्राओं के उपयोग में आने वाली पुस्तके,पेन,कॉपी,कवर इत्यादि वस्तुए शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के बाद गोपनीयता के आधार अभिभावकों को किसी प्रकाशक या दुकान विशेष से क्रय करने हेतु बाध्य किया जाता है। जिससे अभिभावकों से विक्रेताओं द्वारा मनमाफिक शुल्क वसूला जाता है एवं अभिभावकों को विद्यालय की फीस के अतिरिक्त तीन चार गुना ज्यादा राशि देकर बच्चों की प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तके खरीदना पड़ती हैं।,जिससे अभिभावकों को अतिरिक्त आर्थिक भार भी उठाना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ अभिभावक बाध्य हो जाते हैं एवं उनके बच्चों को बीच सत्र में ही पढ़ाई छोड़कर जाना पड़ रहा है जिस कारण अशासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों में असंतोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर निजी शिक्षण संस्थाओं में एन सी ई आर टी,माध्यमिक शिक्षा मंडल की पुस्तकों द्वारा अध्यापन कार्य कराए जाने का नियम लागू कर दिया जाए तो अभिभावकों को अतिरिक्त आर्थिक भार से मुक्ति मिल सकेगी एवं अध्यापन कार्य में एकरूपता आ सकेगी।
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