गृहस्थ सन्त श्री देव प्रभाकरशास्त्री दद्दा जी हुए ब्रह्मलीन
कटनी। ।प्रसिद्ध गृहस्थ संत श्री देव प्रभाकर जी शास्त्री (दद्दा जी) का आज दद्दा धाम कटनी में देहावसान हो गया। वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनको एयर एंबुलेंस से दिल्ली से जबलपुर होते हुए कटनी लाया गया था । पूर्व मंत्री संजय सत्येन्द्र पाठक ने इसकी पुष्टि की है। रविवार, १७ म ई की रात्रि ८.३० पर उन्होंने आखिरी सांसे लीं।उनके निधन की खबर जंगल में आग की तरह फैल गयी। जिसके बाद उनके शिष्यों तथा अनुयायियों में गहरा शोक फैल गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित अनेक लोगो ने दुख व्यक्त किया है।
कटनी पहुंचने की सूचना मिलते ही सुबह से पूरे भारतवर्ष के शिष्यों ने आध्यात्मिक संकल्प के साथ पूज्य गुरुदेव के स्वास्थ्य लाभ हेतु कामना करते देखे गये थे। उनके दर्शन के लिये आने वालों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी साधना सिंह, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राजपाल यादव, गोपाल भार्गव ,विधायक पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ,विधायक पूर्व मंत्री, कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव भाजपा, रमेश मेंदोला विधायक , संजय पाठक पूर्व मंत्री विधायक, आलोक चतुर्वेदी विधायक छत्तरपुर, नीरज दीक्षित बिधायक महाराजपुर, प्रद्युम्न सिंह लोधी बिधायक बड़ा मलहरा, डग्गी राजा विधायक चंदेरी, राजेश शुक्ला बबलू विधायक बिजावर, नारायण त्रिपाठी विधायक मैहर, संदीप जायसवाल विधायक मुड़वारा, लखन घनघोरिया पूर्व मंत्री विधायक जबलपुर, अर्चना चिटनिस पूर्व मंत्री, विनोद गोटिया पूर्व प्रदेश महामंत्री भाजपा, कटनी के महापौर शशांक श्रीवास्तव, गौरव सिरोठिया आदि थे। सागर में शिष्य मंडल के मंत्री गोविन्द राजपूत, सुरेंद्र सुहाने अजय दुबे,वीरेंद्र गौर,शशांक शर्मा, अरुणोदय चोबे, बंटी श्रीवास्तव ,अमित तिवारी, प्रदीप दुबे सहित हजारों लोगों ने दुख जताया है।
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संक्षिप्त परिचय
*जन्मस्थान। ग्राम कूड़ा (मरदानगढ) पो.बाकल
वर्तमान आश्रम घनश्याबाग आश्रम, कूड़ा
*जन्म तिथि:भाद्रपद शुक्ल अनन्त चतुर्दशी वि.सं. 1996
*पितां: ब्रह्मलीन पं. गिरधारी दत्त शास्त्री
*माता :स्वर्गीया ललिता देवी
*गुरु दीक्षा ब्रह्मलीन स्वामी करपात्री जी द्वारा
*गुरु माता: श्रीमति कुन्ती देवी
*परिवार : 3 पुत्र, 2 पुत्रियां, नाती, नातिन, सहित भारत वर्ष में शिष्यों के धनी
*शिक्षा:व्याकरणचार्य (वेद वेदांगों के ज्ञाता) कार्यक्षेत्र पूर्व में महाविद्यालयों में ,प्राध्यापक रहकर अध्यापन कार्य
*पश्चात: गुरु आदेश का परिचालन कर शिवशक्ति जागरण के वैश्विक प्रणेता
: सतत् यज्ञ-कार्य संलग्न तथा वैश्विक परिस्थितियों का सामंजस्य स्थापित किया
:विश्व कल्याण की अदभुत योजनाओं को विस्तृत कर प्रसारण की दिशा नियत करना।
*शिक्षा स्थल: नारायणी संस्कृत महाविद्यालय कटनी (म.प्र.)
: वारणसेय संस्कृत वि.वि. वारणसी वर्तमान सम्पूर्णानन्द संस्कृत विद्यापीठ वाराणसी (उ.प्र.)
*जीवन:तपोनिष्ठ, दयालु, सहज एवं सरल, सार्वभौमिक दृष्टि एवं समानता की नजर
दयालु एवं प्रसन्नचित्त
*दद्दाजी ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण को हमेशा महत्वपूर्ण माना और अनेक विशाल आयोजन देशभर में किये। उनके शिष्य भारी संख्या में है
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