वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में गूंजी चीतों की दहाड़, बुंदेलखंड बना प्रदेश का तीसरा चीता आवास
• मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो चीतों को किया विमुक्त, नर का नाम ‘व्योम’ और मादा का ‘नीरा’ रखा; अगले माह दो और चीते आएंगे
तीनबत्ती न्यूज: 7 अक्टूबर 2026
सागर।बुंदेलखंड की धरती पर बुधवार को करीब डेढ़ सदी बाद एक बार फिर चीतों की मौजूदगी दर्ज हुई। सागर जिले के नौरादेही क्षेत्र स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो चीतों को विमुक्त कर मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना के एक नए अध्याय की शुरुआत की। इसके साथ ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व प्रदेश का तीसरा चीता आवास क्षेत्र बन गया।
मुख्यमंत्री ने विमुक्त किए गए दोनों चीतों का नामकरण भी किया। नर चीता, जिसका पूर्व नाम थोलो था, अब ‘व्योम’ और मादा चीता, जिसका पूर्व नाम सीसीबी-3 था, अब ‘नीरा’ के नाम से जानी जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प से शुरू हुआ चीता पुनर्स्थापना अभियान मध्यप्रदेश में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। कूनो और गांधीसागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड भी विश्व के वन्यजीव संरक्षण मानचित्र पर प्रमुखता से अंकित हो गया है।
लगभग 150 वर्ष बाद बुंदेलखंड में चीतों की वापसी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस क्षेत्र में करीब 160 से 170 वर्ष पहले चीतों की मौजूदगी के प्रमाण मिलते हैं। इतने लंबे अंतराल के बाद बुंदेलखंड की धरती पर चीतों की वापसी ऐतिहासिक अवसर है। वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना की शुरुआत हुई थी और इसके बाद चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की विशेषता यह है कि यहां टाइगर के साथ चीते भी प्राकृतिक आवास में रहेंगे। क्षेत्र में नीलगाय, चिंकारा, हिरण सहित अनेक वन्यप्राणी मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रजातियों के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
‘जियो और जीने दो’ की भावना से वन्यजीव संरक्षण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के हितों और उनकी आजीविका की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाते हुए ‘जियो और जीने दो’ की भावना से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि करीब 41 वर्ष पूर्व जब इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, तब स्थानीय लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाकर ही संरक्षण को मजबूत किया जा सकता है।
पर्यटन और ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभयारण्यों में पर्यटन, जंगल सफारी और अन्य गतिविधियों से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों और समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। पर्यटकों से प्राप्त राशि में समितियों को भी हिस्सा दिया जा रहा है, ताकि जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। बफर क्षेत्र के गांवों में होम स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण अपने घरों में एक से तीन कमरे तैयार कर पर्यटकों को सुविधा दे सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से करीब दो से तीन लाख रुपये तक का अनुदान भी दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में खेती की जमीन सीमित होने के कारण पशुपालन और दूध उत्पादन ग्रामीणों की आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। किसान कल्याण वर्ष में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और समितियों के माध्यम से किसानों से दूध खरीदकर उन्हें उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना
चीता विमुक्ति के बाद आयोजित राज्य स्तरीय वन्य प्राणी सप्ताह के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस की पूर्व सरकारों पर वन्यजीव संरक्षण को लेकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के समय चीता तो छोड़िए, टाइगर भी कम होते गए और जंगल खाली हो गए, जबकि भाजपा सरकार में जंगल आबाद हुए हैं। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “एक पप्पू भी है जो मानता ही नहीं है” और सत्ता की चाह में वह जो कर रहा है, भगवान उसे सद्बुद्धि दे।
अगले माह दो और चीते आएंगे
मुख्यमंत्री ने बताया कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बुधवार को दो चीते विमुक्त किए गए हैं। अगले माह दो और चीते यहां लाए जाएंगे। इससे क्षेत्र में चीतों का कुनबा बढ़ेगा और यह उनके लिए स्थायी एवं अनुकूल आवास के रूप में विकसित होगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती वन्यप्राणियों के लिए अनुकूल है। प्रदेश में टाइगर की संख्या देश में सर्वाधिक है। गिद्ध संरक्षण, कछुआ संरक्षण, चंबल के घड़ियाल और नदियों के जलीय जीवों के संरक्षण की दिशा में भी लगातार कार्य किए जा रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण केवल किसी एक प्रजाति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का विषय है
बुंदेलखंड में पर्यटन की नई संभावनाएं
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि लंबे समय से बुंदेलखंड में चीतों की पुनर्स्थापना की चर्चा होती रही है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष फोकस और प्रयासों से अब यह महत्वपूर्ण पहल साकार हुई है। उन्होंने कहा कि चीतों की वापसी से बुंदेलखंड के इतिहास में नया अध्याय जुड़ा है।
दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी ने कहा कि चीतों की पुनर्स्थापना के बाद क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। उन्होंने स्थानीय युवाओं को विभिन्न भाषाओं का प्रशिक्षण देने और गाइड प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता बताई, ताकि युवाओं को पर्यटन से रोजगार मिल सके।
पूर्व मंत्री और रहली विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि इस क्षेत्र का इतिहास वन और पर्यावरण संरक्षण के संघर्ष से जुड़ा रहा है। उन्होंने क्षेत्र में बसाहट एवं पुनर्वास, आजीविका से जुड़े कार्यक्रम और रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं और बच्चों के लिए अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं के प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की मांग भी रखी।
वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार वर्ष 2026 के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले 12 अधिकारी-कर्मचारियों को सम्मानित किया। इनमें उप संचालक पुनीत गोरेवाल, सहायक वन संरक्षक राजा खरे, वन क्षेत्रपाल कार्तिकेय शुक्ला, वनपाल दिलीप वाघमारे, वनपाल एवं डॉग हैंडलर पदम सिंह राजपूत, वनरक्षक एवं डॉग हैंडलर रामकृष्ण पराशरी, वनरक्षक गौतम शर्मा एवं आलोक प्रजापति सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। सम्मानित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पेंच, सतपुड़ा, वीरांगना दुर्गावती, कूनो और पन्ना सहित विभिन्न वन क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण, सुरक्षा, प्रबंधन, गौर पुनर्स्थापना और निगरानी में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
पुस्तिकाओं का विमोचन और ‘चीता मित्र’ से संवादमुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान गिद्ध संख्या आकलन एवं वन्यजीव संरक्षण, ‘हमार वीडीटीआर’ और ‘बाघिन दीदी’ पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने ‘चीता मित्र’ और ‘बाघिन दीदी’ से संवाद कर उनके अनुभवों और कार्यों की जानकारी भी ली। कार्यक्रम के अंत में वन विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया।
ये रहे शामिल
कार्यक्रम में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सांसद राहुल सिंह लोधी, विधायक गोपाल भार्गव, विधायक शैलेन्द्र जैन, विधायक प्रदीप लारिया, विधायक बृज बिहारी पटेरिया, विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, भाजपा नेता श्याम तिवारी, सागर ग्रामीण भाजपा जिलाध्यक्ष रानी कुशवाहा, संभागायुक्त दिलीप कुमार, आईजी इरशाद वली, डीआईजी एस.एस. चौहान, कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मोहाली हेलीपेड आगमन, हुआ भव्य स्वागत
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता विमुक्त कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज विधानसभा रेहली के मोहाली हेलीपेड पर आगमन हुआ। हेलीपेड पर जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्प गुच्छ देकर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया।
इस अवसर पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, सांसद श्री राहुल लोधी, रेहली विधायक श्री गोपाल भार्गव, सागर विधायक श्री शैलेंद्र जैन, बंडा विधायक श्री वीरेंद्र सिंह, नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया, देवरी विधायक श्री बृज बिहारी पटेरिया श्री श्याम तिवारी, श्रीमती रानी कुशवाहा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों में आईजी श्री इरशाद वली, डीआईजी श्री एस.एस. चौहान, एसपी श्री अनुराग सुजानिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
439 हेक्टेयर में तैयार हुआ चीता आवास
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के सुरक्षित और अनुकूल आवास के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। चीतों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ सुरक्षित बाड़े, निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच से जुड़ी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
वन विभाग की टीम चीतों की नियमित निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। साथ ही क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है, जिससे चीता, टाइगर और अन्य वन्यजीवों के बीच प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है टाइगर रिजर्व
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़ों में भी इसका कुल
क्षेत्रफल करीब 2,339.12 वर्ग किलोमीटर दर्ज है। यहां बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, भालू सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। रिजर्व की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह क्षेत्र ऊपरी विंध्य क्षेत्र का हिस्सा है और सागर, दमोह तथा नरसिंहपुर में विस्तृत है।